‘सीमित अधिकारों के बावजूद महिलाओं के हक के लिए पुरजोर पैरवी कर रहा महिला आयोग’

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मेरठ : राज्य महिला आयोग के पास बेहद सीमित अधिकार हैं। इसके बावजूद आयोग प्रदेश की महिलाओं के उत्पीड़न को रोकने और उन्हें उनका अधिकार दिलाने के लिए पुरजोर पैरवी कर रहा है। देवरिया जैसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए आयोग प्रदेश के सभी शैल्टर होम की गहनता से जांच में जुटा है।
यह कहना है उत्तर प्रदेश राज्य महिला आयोग की उपाध्यक्ष सुषमा सिंह का। दरअसल, आज सुषमा सिंह महिला उत्पीड़न को लेकर माह में दो बार होने वाली जनसुनवाई के लिए सर्किट हाउस पहुंची थीं। इस दौरान उन्होंने दहेज उत्पीड़न, दुष्कर्म पीड़िताओं और अन्य कई महिला अपराधों से संबंधित मामलों पर सुनवाई की। इस दौरान मीडिया से हुई संक्षिप्त वार्ता में उन्होंने बताया कि योगी सरकार में महिला आयोग के गठन के बाद से माह के पहले और तीसरे बुधवार को हर जिले में राज्य महिला आयोग द्वारा जनसुनवाई की जाती है। इसका उद्देश्य यह है कि जो महिलाएं अपनी समस्याएं पुरूष अधिकारियों के सामने बताने से झिझकती हैं। या फिर जिन महिलाओं की पहुंच महिला थानों या आशा ज्योती केन्द्रो तक नहीं है, वह अपनी समस्या सीधे आयोग के सदस्यों के सामने रख सकें।

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