हिन्दू विवाह एवं तलाक से सम्बन्धित कानूनी राय।

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मेरठ ग्लोब न्यूज लेकर आया है एक नया सेग्मेन्ट “कानूनी राय”। जिसके माध्यम से हम आपको आपको उपलब्ध करायेंगें कानूनी राय और आज की कानूनी राय में हमारे संवादाता ने एडवोकेट नितिन कान्त अहलूवालिया से एक मुलाकात कर हिन्दू मैरिज एक्ट के अन्तर्गत तलाक से सम्बन्धित अधिकारों और उनसे जुड़ी कानूनी प्रक्रिया के बारे में बात कर कुछ महत्वपूर्ण जानकारियाँ प्राप्त की।

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पेश है उनसे बातचीत के दौरान पूछे गये मुख्य सवाल और उनके जबाब।

(1) आज समाज में तलाक की समस्या क्यों बढ़ रही है?
जवाब : एडवोकेट नितिन कान्त अहलूवालिया ने बताया कि आज तलाक की एक वजह ईगो भी है साथ पति-पत्नि की एक दूसरे के प्रति बढ़ती अपेक्षाँए है।

(2) तलाक किन-किन मुख्य आधारों पर लिया जा सकता है?
जवाब : तलाक के मुख्य आधार शादी के दौरान एक पक्ष का किसी अन्य के साथ अवैध सम्बन्ध, क्रूरता, पागलपन या मानसिक बीमारी, धर्म का त्याग करना, गम्भीर बीमारी होना आदि है।

(3) क्या बिना कानून की सहायता के घर पर बैठ कर किये गये समझौते से भी तलाक हो सकता है?
जवाब : घर बैठे आपसी रजामन्दी से लिया गया तलाक कतई मान्य नहीं होता।

(4) शादी के बाद तलाक के लिये कम से कम कितने समय बाद आवेदन किया जा सकता है।
जवाब :  किसी भी प्रकार के तलाक के लिये कम से कम एक साल के बाद ही तलाक के लिये आवेदन किया जा सकता है क्योकि किसी भी तलाक की अर्जी पर तभी सुनवाई हो सकती है जबकि पति व पत्नी कम से कम 1 वर्ष तक अलग रह रहे हो। परन्तु विशेष परिस्थितियों में यह आवेदन एक वर्ष से पहले भी किया जा सकता है।

(5) तलाक की अर्जी कौन डाल सकता है तथा तलाक की प्रक्रिया में कितना समय लगता है?
जवाब : पति या पत्नि कोई भी तलाक की याचिका कोर्ट में डाल सकता है और यदि आपसी सहमति से तलाक की याचिका पति और पत्नि दोनों द्वारा कोर्ट में डाली जाती है तो मात्र 6 माह में तलाक हो जाता है।

(6) तलाक के कितने समय बाद पुनर्विवाह किया जा सकता है ?
जवाब : आपसी सहमती के आधार पर लिया गये तलाक के तुरन्त बाद दोनों पक्षकार शादी कर सकते है।अन्य मामलों में कोर्ट द्वारा विवाह विच्छेद होने के 3 माह तक जो की ऊपरी अदालत में अपील का समय होता है के गुजरने के बाद ही दोबारा शादी की जा सकती है।

 

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