खामियों के खिलाफ 2 सितम्बर को प्रदेश में जीएसटी का पुतला दहन

Effigy-of-state-GST

मेरठ : केन्द्र सरकार द्वारा पास किये गये जीएसटी विधेयक में अनेकों खामियां हैं। इस विधेयक में व्यापारियों की गिरफ्तारी, जेल एवं जुर्माने सहित 30-40 खामियां ऐसी हैं, जो व्यापारियों के लिए अव्यवहारिक एवं भ्रष्टाचार को बढ़ावा देने वाली हैं। जिसे किसी भी हालात में व्यापारी समाज मानने वाला नहीं है। प्रस्तावित जीएसटी की इन खामियों को दूर किये बिना व्यापारी इस प्रस्ताव को किसी भी हालात स्वीकार नहीं करेंगे। यह कहना है उत्तर प्रदेश उद्योग व्यापार प्रतिनिधि मंडल के प्रान्तीय अध्यक्ष बनवारी लाल कंछल का। वह मंगलवार को मेरठ के सर्किट हाउस में पत्रकारों से बात कर रहे थे।

उन्होंने कहा कि जीएसटी में जेल, जुर्माने एवं खामियों के विरोध में 2 सितम्बर 2016 को पूरे प्रदेश के सभी जनपदों एवं तहसीलों में जीएसटी को पुतला दहन किया जायेगा। श्री कंछल ने बताया कि जीएसटी का वर्तमान कानून भ्रष्टाचार एवं व्यापारियों के शोषण को बढ़ावा देने वाला है। वर्तमान जीएसटी कानून कारपोरेट घरानों को बढ़ावा देने वाला एवं छोटे व मध्यम दर्जे के व्यापारियों को खत्म करने वाला कानून है। मौजूदा प्रारूप में 30-40 ऐसी खामियां हैं जो व्यापारियों के व्यापार के लिए हितकर नहीं हैं। वित्त केन्द्रीय मंत्री जेटली जी ने संसद को तो विश्वास में ले लिया है लेकिन व्यापारियों से इस विषय में कोई बात भी नहीं की। अब उन्हें व्यापारियों को भी विश्वास में लेना होगा। वित मंत्री को चाहिए कि वह देश के व्यापार मंडलों के व्यापारी प्रतिनिधियों के साथ बैठक कर जीएसटी विधेयक में जो भी खामियां हैं उनको दूर करने के उपरान्त ही जीएसटी लागू करें, तब व्यापारी इसे सहर्ष स्वीकार करेगा लेकिन इन खामियों को दूर करे बिना यदि केन्द्र सरकार ने व्यापारियों पर जबरदस्ती जीएसटी थोंपने का कार्य किया तो उसका डटकर विरोध किया जायेगा।

बताया कि इस कानून में विभाग के इंस्पेक्टरों को असीमित अधिकार दिये गये है। कोई भी इंस्पेक्टर किसी भी व्यापारी को छोटी मोटी गलतियों पर गिरफ्तार कर सकता है। ऐसे प्रावधानों से इंस्पेक्टर राज और भ्रष्टाचार को और बढ़ावा मिलेगा। जीएसटी के कानूनों में व्यापारियों विभिन्न धाराओं में 5 हजार से 25 हजार तक कई प्रकार के दैनिक जुर्माने का अधिकार जीएसटी अधिकारी को दिया गया है। जीएसटी विश्व के 140 देशों में लागू है जिनमें अधिकांश देशों मे एकपदीय है तथा वहां पर अन्य करों का कोई बोझ नहीं है। जीएसटी की खामियों के बारे में 41 सूत्रीय ज्ञापन तैयार किया गया है। जिसे 6 सितम्बर 2016 को राज्यपाल को दिया जायेगा और यही ज्ञापन देश के सभी सांसदों और मुख्यमंत्रियों को डाक द्वारा प्रषित किया जायेगा।

प्रान्तीय अध्यक्ष बनवारी लाल कंछल ने यह भी बताया कि जीएसटी के प्रस्तावित कानून में केन्द्रीय जीएसटी, प्रान्तीय जीएसटी में दो जगह व्यापारी को पंजीकरण कराना पड़ेगा। यह व्यवस्था अत्यधिक जटिल है। इससे कदम कदम पर भ्रष्टाचार और उत्पीडन में इजाफा होगा। कनाडा और आस्ट्रेलिया जैसे देशों की भांति इस व्यवस्था को एकपदीय किया जाय। एक पंजीकरण, एक रिर्टन और एक कर निर्धारण की व्यवस्था की जाये। जीएसटी एवं सीजीएसटी की विभिन्न धाराओं में 6 महीने, 12 महीने एवं 5 साल तक की जेल की सजा का प्रावधान किया गया है तथा इसे गैर जमानती अपराध बनाया गया है। जीएसटी में जांच के समय अधिकारी को किसी भी अलमारी, बाक्स या परिसर का ताला तोड़कर जांच करने एवं सील करने का अधिकार दिया गया है।

कमिश्नर यदि चाहे तो व्यापारी को गिरफ्तार करने का आदेश दे सकता है। इस कानून के लगने के बाद देश का व्यापारी, व्यापारी न होकर जीएसटी की नजरों में केवल गुनाहगार बना रहेगा। उन्होंने प्रदेश के व्यापारियों से अपील करते हुए कहा कि जीएसटी की खामियों को समाप्त कराने के लिए सभी को एकजुट होकर लंबी लड़ाई लडऩे के लिए तैयार रहना है। उत्तर प्रदेश उद्योग व्यापार प्रतिनिधि मंडल द्वारा निर्धारित किये गये आंदोलन के कार्यक्रमों को सफल बनाने के लिए अपने अपने जनपदों में जुट जायें। मुझे आशा ही नही पूर्ण विश्वास है कि आपकी एकजुटता एवं आंदोलनों से केन्द्र सरकार को जीएसटी में जेल, दैनिक जुर्माने और उसकी खामियों को वापिस लेने के लिए अवश्य ही मजबूर होना पड़ेगा। पत्रकार वार्ता में प्रान्तीय महामंत्री लोकेश कुमार अग्रवाल भी उपस्थित रहे।

366 Total Views 1 Views Today
  • Add a Comment

    Your email address will not be published. Required fields are marked *