सूर्य की किरणों से मिलेगी ऊर्जा

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मेरठ : ड्रोन का प्रयोग अब मोबाइल टावर के रूप में उपभोक्ताओं को सिग्नल उपलब्ध कराने के लिए भी किया जाएगा। सरकार व दूरसंचार नियामक प्राधिकरण ट्राई ने मोबाइल कंपनियों को डीजल की बचत के साथ प्रदूषण पर नियंत्रण करने के विशेष आदेश दिए हैं। संचार क्रांति के इस युग में मोबाइल फोन अहम हो गया है। इसे सिग्नल उपलब्ध कराने के लिए शहर से गांव तक मोबाइल टावर लगाए गए हैं।

हालत यह है कि शहरों में सभी मोबाइल कंपनियों के पांच सौ से एक हजार तक मोबाइल टावर स्थापित हैं। बिजली की स्थिति ठीक नहीं होने से इन टावरों को चलाने के लिए जेनरेटर लगाये गये हैं। संचार मंत्रालय के सर्वे के अनुसार देश में प्रतिदिन संचार उद्योग में दो अरब लीटर डीजल की खपत होती है। साथ ही डीजल के प्रयोग से वायु में लगातार जहरीली गैसें भी फैलती जा रही हैं। अब ट्राई ने सभी मोबाइल कंपनियों को आदेश दिया है कि डीजल की खपत को कम करें। प्रथम चरण में शहरी क्षेत्रों में 50 प्रतिशत और ग्रामीण क्षेत्रों में 20 प्रतिशत डीजल की खपत कम करने तथा डीजल के स्थान पर वैकल्पिक ऊर्जा का प्रयोग करने को कहा गया है।

जिसमें सौर ऊर्जा और वायु ऊर्जा भी शामिल है। केंद्र सरकार की सेफ एनर्जी योजना के तहत संचार मंत्रालय ने भी सभी मोबाइल कंपनियों को डीजल की खपत कम करने और प्राकृतिक ऊर्जा का अधिक प्रयोग करने को कहा है, पर अलग-अलग स्थानों पर मोबाइल टावर लगे होने से सौर व वायु ऊर्जा कारगर साबित नहीं हो रही है। बीएसएनएल इसके लिए अब आधुनिक उपकरणों को अपनाने जा रहा है। इसके तहत ड्रोन को मोबाइल टावर बनाने की तैयारी की जा रही है। ड्रोन व उसमें लगे मोबाइल टावर सिस्टम को ऊर्जा सूर्य की किरणों से मिलेगी तथा वायरलैस मोबाइल एक्सचेंज द्वारा इसे नेटवर्क उपलब्ध कराया जाएगा। ड्रोन सिस्टम मोबाइल उपभोक्ताओं को सिग्नल उपलब्ध कराने का काम करेगा। इसके बाद जमीन पर लगे मोबाइल टावरों को समाप्त कर दिया जाएगा।

बीएसएनएल डीजल की खपत कम करने के लिए आधुनिक उपकरणों का प्रयोग करने की तैयारी में जुट गया है। बीएसएनएल की तकनीकी टीम ने ड्रोन को मोबाइल टावर बनाने का काम भी शुरू कर दिया है।

संजीव त्यागी – उप महा प्रबध्ंक बीएसएनएल

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