हार की समीक्षा करने आए बसपा नेताओं को पड़ गए लेने के देने

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मेरठ : यूपी विधानसभा चुनाव में बुरी तरह से हुई हार की समीक्षा बैठक करने पहुंचे पार्टी के वरिष्ठ नेताओं को उस समय लेने के देने पड़ गए, जब कार्यकर्ताओं ने टिकट वितरण में वसूली को हार का कारण बताते हुए हंगामा खड़ा कर दिया। कार्यकर्ताओं ने समीक्षा बैठक लेने पहुंचे बसपा के वरिष्ठ नेता नसीमुद्दीन सिद्दकी को खरीखोटी सुनाईं और पश्चिमी उत्तर प्रदेश प्रभारी अतर सिंह राव का पुतला फूंकते हुए उनके निष्कासन की मांग की। कार्यकर्ताओं का रूख देेख चंद मिनटों में ही बैठक समाप्ति की घोषणा कर वरिष्ठ नेता मौके से खिसक गए।

दरअसल, पिछले दिनों यूपी में हुए विधानसभा चुनावों में बसपा बुरी तरह से हार का सामना करना पड़ा। मेरठ जनपद में अच्छा खासा वोट बैंक होते हुए भी सात में से किसी भी सीट पर हाथी नहीं दौड़ सका। हार की समीक्षा के लिए मंगलवार को बसपा के राष्ट्रीय महासचिव और राज्यसभा सांसद नसीमुद्दीन सिद्दकी फूलबाग कालोनी स्थित बसपा जिला कार्यालय में कार्यकर्ताओं और हारे हुए प्रत्याशियों की समीक्षा बैठक लेने पहुंचे थे। जैसे ही नसीमुद्दीन सिद्दकी ने बोलना शुरू किया, तभी कार्यकर्ताओं ने विरोध शुरू करते हुए उनकी मुर्दाबाद के नारे लगाने शुरू कर दिए। उन्होंने पार्टी के उत्तराखंड प्रभारी रहे एमएलसी अतर सिंह राव और प्रशांत गौतम के विरोध में भी जमकर नारेबाजी की। कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया कि इन तीनों ने चुनाव में मोटी रकम वसूलकर ऐेसे प्रत्याशियों को विधानसभा का टिकट थमा दिया, जिनकी औकात सभासद का चुनाव जीतने की नहीं थी। कार्यकर्ताओं का कहना था कि उक्त तीनों नेता हर मामले में कार्यकर्ताओं से वसूली करते हैं और बहन जी का नाम बदनाम करते हैं। यहां तक कि लखनऊ में बहन जी मिलवाने के नाम पर भी कार्यकर्ताओं से अवैध वसूली की जाती है। गुस्साए कार्यकर्ताओं ने नसीमुद्दीन सिद्दकी से हाथापाई करते हुए माइक छीनने का प्रयास किया, तो कार्यकर्ताओं का रूप देख वह चंद मिनटों में बैठक समाप्ति की घोषणा करते हुए मौके से रवाना हो गए। इसके बाद कार्यकर्ताओं ने जमकर हंगामा किया। उन्होंने पार्टी कार्यालय के बाहर एमएलसी अतर सिंह राव का पुतला फूंकते हुए उन्हें बसपा से निष्कासित किए जाने की मांग की। उन्होेंने आरोप लगाया कि विधानसभा चुनाव के दौरान अतर सिंह राव उत्तराखंड के प्रभारी थे, लेकिन चुनाव को प्रभावित करने के लिए पूरे चुनाव हस्तिनापुर में डटे रहे। कार्यकर्ताओं के हंगामे के चलते समीक्षा बैठक शुरू होने से पहले ही समाप्त हो गई।

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