लाइलाज बीमारी है ग्लैडर्स, बचाव ही तरीका

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मेरठ : अपर निदेशक पशु पालन मेरठ मण्डल डा0 एस0के0 श्रीवास्तव ने बताया कि पशुओं में ग्लैडर्स बीमारी के लक्षण मिलने पर राष्ट्रीय अनुसंधान केन्द्र हिसार (हरियाणा) सैम्पिल भेजकर रिर्पोट आने पर प्रिवेन्शनस एड कन्ट्रोल आफ इनफेक्शियस एंव कन्टीजियस डिजीज इन एंनीमल एक्ट 2009 के तहत कार्यवाही करने का प्राविधान हैं। मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी डा0 हरपाल सिंह ने कार्यक्रम की विस्तृत जानकारी प्रस्तुत करते हुए बताया कि यह कार्यक्रम जनमानस से जुड़ा है। उन्होंने बताया कि यह बीमारी पशुओ से मनुष्य में भी फैल सकती है जो लाइलाज एवं घातक है। उन्होंने बताया कि इस बीमारी से ग्रस्त पशु इलाज के बाद सामान्य दिखते हुए भी बीमारी फैलाता रहता है। उन्होंने इसके उपाय हेतु बताया कि बीमार पशु को स्वस्थ पशु अलग रखें तथा उनका चारा पानी भी अलग करें, ऐसे पशु को छूने या सम्पर्क में आने के बाद हाथों को ऐटीसैप्टिक या साबुन से घोना चाहिए।

उन्होंने बताया कि जनपद में कोई केस ग्लैन्डर्स एवं फारसी बीमारी का नहीं है लेकिन फिर भी आसपास के जनपदों की स्थिति को देखते हुए सावधानी हेतु पशु चिकित्साधिकारियों को प्रशिक्षण दिया जा रहा है जिसके बाद सभी को सतर्क रहकर अश्व प्रजाति की पशुओं प्रतिमाह 08 ग्राम सभाओं को प्रति पशु चिकित्सक को ग्लैडर्स बीमारी की निगरानी करेंगे तथा आवश्यकतानुसार पशु का रक्त एकत्र कर राष्ट्रीय अनुसंधान केन्द्र हिसार (हरियाणा) सैम्पिल भेजेंगे। उन्होंने बताया कि यह कार्यक्रम 15 मार्च से ग्राम स्तर पर शुरू किया जाएगा। इस अवसर पर सीनियर वैटेनरी सर्विसेस बुक इण्डिया ऐनीमल हाॅस्पिटल के डा0 इमरान व डा0 सौरभ सिंह ने उपस्थित पशु चिकित्सकों को जानकारी देते हुए बताया कि यह एक जैनेटिक बीमारी है जो मनुष्य में भी फैलती है। इस बीमारी को तत्काल पहचाने व समसय उसका बचाव आवश्यक हैं। इस अवसर पर उप जिलाधिकारी सदर हर्षिता माथुर, उप मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी डा0 विनोद कुमार सहित पशु चिकित्सक एवं विषय विशेषज्ञय उपस्थित रहे।

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