क्या है बालकों का निशुल्क एवं अनिवार्य शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009


शिक्षा का अधिकार 6 वर्ष से 14 वर्ष तक के बालकों का मौलिक अधिकार है जो कि भारतीय संविधान के अनुच्छेद-21A में वर्ष 2002 में जोड़ा गया है तथा वर्ष 2009 मेंशिक्षा का अधिकार अधिनियम बनाया गया जिसके अन्तर्गत चौदह वर्ष तक के बालकों को निशुल्क एवं अनिवार्य शिक्षा प्रदान करना सरकार एवं प्रत्येक माता पिता का दायित्व है।

निशुल्क और अनिवार्य शिक्षा के लिए विद्यालयों के दायित्व की सीमा

सरकार या किसी स्थानीय प्राधिकार (Local Authority) द्वारा स्थापित उसके स्वामित्वाधीन या नियंत्रणाधीन विद्यालयों यानि (सरकारी विद्यालयों) में सभी बालको को लिए 100 प्रतिशत सीट आरक्षित।
विद्यालय जो सरकार या स्थानीय प्राधिकार से सहायता या अनुदान (Aids या Grants) प्राप्त करते है ऐसे विद्यालयों में न्यूनतम पच्चीस प्रतिशत सीट आरक्षित।
विद्यालय जो सरकार या स्थानीय प्राधिकार से किसी भी प्रकार की सहायता या अनुदान प्राप्त नही करते यानि पूर्णतया प्राईवेट विद्यालयों में गरीब वर्ग के बालको के लिए 25 प्रतिशत सीट आरक्षित।

माता पिता और संरक्षक का कर्तव्य
इस अधिनियम के अन्तर्गत प्रत्येक माता पिता या संरक्षक का कर्तव्य है कि वह अपने बच्चों को विद्यालय में प्रवेश जरूर कराये साथ ही इसे संविधान के अनुच्छेद-51 (k) द्वारा प्रत्येक माता पिता और संरक्षक का मौलिक कर्तव्य भी बनाया गया है।

बच्चो का अधिकार

6 वर्ष से 14 वर्ष तक के प्रत्येक बच्चे का यह मौलिक अधिकार है कि उसकी प्राथमिक शिक्षा (Elementary Education) पूरी होने तक उसको न तो किसी भी कक्षा में फेल किया जायेगा और न ही स्कूल से निकाला जायेगा। साथ ही बच्चों को शारीरिक एवं मानसिक प्रताडना देने पर भी रोक है।

विद्यालयो के दायित्व
कोई भी विद्यालय किसी भी बालक को प्रवेश देते समय कोई प्रतिव्यक्ति फीस (Capitation Fees) की मांग नहीं करेगा। प्रवेश के समय आयु प्रमाण पत्र (Birth Certificate) के अभाव में किसी बच्चे का प्रवेश नही रोका जायेगा। माता पिता या संरक्षक द्वारा बच्चे की आयु के सम्बन्ध में शपथपत्र (Affidavit) भी जन्म सम्बन्धित पर्याप्त दस्तावेज माना जायेगा।

शिक्षकों के कर्तव्य
कोई शिक्षक/शिक्षिका प्राईवेट टयूशन जैसे कार्य नहीं करेंगे।
शिक्षण कार्य से अलग कोई अन्य कार्य भी पूर्णतया प्रतिबंधित है।

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