मिलावट की मंडी के काले कारोबारियों पर व्यापार कर विभाग की हुई तिरछी नजर

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मेरठ : मिलावट की मंडी के नाम से मशहूर सिंथेटिक मिठाईयों के काले कारोबारियों से बेखबर व्यापार कर विभाग ने हमारे समाचार पत्र में प्रकाशित खबर का असर लिया, जिसके चलते सिंथेटिक मिठाईयों का धंधा करने वालों पर शिकंजा कसते हुए नोटिस जारी किये गये है। अभी तक हजारों रुपये लगाकर सिंथेटिक मिठाईयां बेचकर लाखों रुपये कमा रहे काले कारोबारी व्यापार कर विभाग की नजर से दूर थे लेकिन खबर पढऩे के साथ ही विभाग ने कर लगाने के लिये नोटिस जारी कर व्यापार कर विभाग में रजिस्ट्रेशन कराने की चेतावनी दी गई है। समय में कर का पंजीकरण ना कराने पर छापा मारकर भारी कर लगाने की चेतावनी दी गई है जिसके चलते इस धंधे के काले कारोबारियों में हड़कंप मच गया है।

बतादें की थाना सरूरपुर के क्षेत्र के गांव जसड़ सुल्तान नगर, जैनपुर, डाहर, गोटका, मुल्हेडा, हर्रा आदि गांव सिंथेटिक मिठाईयों की बड़ी मंडी बनी हुई है और इसमें हजारों लगाकर लाखों कमाने वाले काले कारोबारियों की बनी मिठाईयों की सप्लाई दिल्ली से लेकर देहरादून व कानुपर से लेकर आगरा तक होती है। छोटे कारखानों से शुरु हुए कारोबारियों ने कम लागत मोटी कमाई होने के कारण मिनी उद्योगों का रुप ले लिया है। और यहां से हर रोज टनों की संख्या में सिंथेटिक दूध व मावे छेने से बने बंगाली रसगुल्ले, मिल्क केक, बर्फी, सोनपपडी, पेठे की मिठाई और काली बर्फी पनीर आदि की सप्लाई गाडियों से होती है। लेकिन मजे की बात यह है कि हर महीने लाखों रुपये कमाने वाले इन काले कारोबारियों के पास ना तो व्यापार कर का रजिस्ट्रेशन है और ना ही मिनी उद्योग का दर्जा न मजूदरों का पंजीकरण न प्रदूषण विभाग व बाट माप विभाग का कोई पैमाना।

जिसके चलते ये लोग मोटी चांदी काट रहे है। इस संबंध में हमारे समाचार पत्र में प्रकाशित खबर को पढ़कर व्यापार कर की नींद टूट गई है। जिसने तुरंत बाद ही एक्शन लेते हुए व्यापार कर विभाग ने काले कारोबारियों पर शिकंजा कसने की नीयत करते हुए नोटिस जारी कर दिये हैं। जिन्हें व्यापार कर लगाने की बात कहते हुए खुद ही एक तय सीमा में पंजीकरण कराकर शुल्क समय से अदा करने की चेतावनी जारी कर दी गई है। जिसके बाद विभाग ने अग्रिम सख्त कार्रवाई को भी अमल में लाने की चेतावनी नोटिस में दी है। जिसे लेकर सिंथेटिक मिठाईयों की मिलावट की मंडी के कारोबारियों में बुरी तरह से हड़कंप मच गया है और उनके पैरों तले की जमीन खिसक चुकी है। इसे लेकर सभी कारोबारी अपने बचाव का जुगाड तलाश करने में जुट गए हैं।

हालांकि इन काले कारोबारियों पर अभी प्रदूषण विभाग, श्रम विभाग, बाट माप विभाग, उद्योग विभाग आदि की नजर नही पडी है जिससे इनकी अभी भी चांदी ही चांदी है और धडल्ले से जमकर इस त्यौहारी सीजन में सिंथेटिक मिठाईयों का उत्पादन करके दूर दराज तक सप्लाई करने में जी जान से जुटे हुए हैं। जिसमें तमाम खामियां ही खामियां नजर आएंगी लेकिन जिले के सरकार विभाग सोए हुए हैं, जबकि काले कारोबारी त्यौहारों पर लोगों की सेहत खिलवाड़ करते हुए उसे बिगाडऩे के लिये दिन-रात लगे हुए हैं।

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