सीनियर का चैम्बर कब्जाना चाहती थी वकील साहिबा, अब हुआ ये हाल…

मेरठ : मेरठ की कचहरी में एक वरिष्ठ अधिवक्ता का चैम्बर कब्जाए बैठी एक महिला अधिवक्ता ने बुधवार को किसी कार्यवश चैम्बर पहुंची वरिष्ठ अधिवक्ता की पत्नी और ससुर के साथ मारपीट कर डाली। दोनों पक्षों के बीच जमकर हंगामा हुआ। महिला अधिवक्ता ने चैम्बर के आधे हिस्से पर अपनी दावेदारी जताई, तो वरिष्ठ अधिवक्ता के परिजनों ने उसके दावे को खारिज कर दिया। मौके पर पहुंची पुलिस ने चैम्बर पर ताला लगवाते हुए दोनों पक्षों से इस मसले को बार एसोसिएशन के माध्यम से सुलझाने की बात कही है।

दरअसल, डिफेंस कॉलोनी निवासी वरिष्ठ अधिवक्ता अरविंद के कचहरी स्थित चैम्बर पर पीएल शर्मा रोड निवासी अधिवक्ता दीप्ती सिंह भी बैठती है। अरविंद की पत्नी शेफाली के अनुसार पिछले करीब डेढ़ माह से अरविंद का स्वास्थ्य खराब चल रहा है और वह कचहरी नहीं आ पा रहे। पिछले कई दिनों से उन्हें सूचना मिल रही थी कि दीप्ती अकारण चैम्बर खोलकर उसमें बैठ जाती है। बुधवार शेफाली अपने पिता सुधीर के साथ अपने पति अरविंद के चैम्बर पर पहुंची और कुछ जरूरी कागजात ले जाने लगी। आरोप है कि दीप्ती ने चैम्बर और वहां के सारे सामान पर अपना हक जताते हुए उनके साथ गालीगलौच शुरू कर दी। शैफाली और उनके पिता ने विरोध किया तो दीप्ती मारपीट पर उतारू हो गई और चैम्बर पर अपना ताला जड़ दिया। इस दौरान कुछ वरिष्ठ अधिवक्ताओं ने विरोध किया तो दीप्ती ने उनके साथ भी अभद्रता की। कचहरी में हंगामे की जानकारी के बाद सिविल लाइन पुलिस मौके पर पहुंची। महिला अधिवक्ता की पुलिसकर्मियों से भी तीखी बहस हुई। उसने आधे पर अपना अधिकार जताया, लेकिन जब पुलिस ने कागजात मांगे तो वह नहीं दिखा सकी। बाद में पुलिस ने चैम्बर को सील करते हुए दोनों पक्षों से इस मसले को बार एसोसिएशन के माध्यम से सुलझाने की सलाह दी।

इंस्पेक्टर सिविल लाइन ने बताया कि दोनों में से किसी पक्ष की ओर से तहरीर नहीं मिली है, तहरीर मिलने पर जांच कराई जाएगी। वहीं मेरठ बार एसोसिएशन के महामंत्री अजय शर्मा ने बताया बीते अक्टूबर माह में महिला अधिवक्ता की बार से सदस्यता समाप्त रद्द की जा चुकी है। उन्होंने बताया कि उक्त महिला की एलएलबी की डिग्री वर्ष 2012 की है, जबकि वर्ष 2010 के बाद एलएलबी करने वाले किसी भी अधिवक्ता को कचहरी में प्रैक्टिस के लिए बार काउंसिल आॅफ इंडिया की एक परीक्षा उत्तीर्ण करना अनिवार्य है। ऐसा न करने पर पांच वर्ष बाद स्वत: ही उसकी डिग्री निरस्त हो जाती है। उन्होंने बताया कि इस मामले में जांच कराई जा रही है, चूंकि महिला ने उक्त परीक्षा को पास करने से संबंधित कोई प्रमाण बार के समक्ष प्रस्तुत नहीं किया है।

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