देखिए वीडियो … वंदे मातरम नहीं गाया तो मेयर को गुस्सा आया

मेरठ : गैर हिंदु पार्षदों द्वारा नगर निगम की बोर्ड बैठक में वंदे मातरम के दौरान बाहर चले जाने का मुद्दा तूल पकड़ गया है। वहीं इस मामले में मेयर हरिकांत अहलुवालिया ने अपना रूख स्पष्ट करते हुए कहा कि वंदे मातरम किसी संप्रदाय विशेष के लिए नहीं, बल्कि यह राष्ट्रगीत है, जिसका अपमान करने का अधिकार किसी को नहीं है। ब्रहस्पतिवार को अपने कार्यालय में पत्रकारों से बात करते हुए उन्होंने विधिक राय लिए जाने के बाद आगे की कार्यवाही की बात कही है। उधर, मेयर और भाजपा पार्षदों द्वारा वंदे मातरम को लेकर चल रही बयानबाजी को लेकर नगर निगम की राजनीति ही नहीं बल्कि पूरे प्रदेश में भी बवाल मचा है, जहां एक ओर भाजपा के लोग इसका समर्थन कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर सपा और अन्य दल के नेता इसे भाजपा की दबंगई करार दे रहे हैं।

क्या है मामला

दरअसल, मंगलवार को घंटाघर स्थित टाउन हाॅल में नगर निगम की बोर्ड बैठक में वंदे मातरम की शुरूआत के साथ हमेशा की तरह मुस्लिम पार्षद बाहर चले गए थे। इस बात को लेकर भाजपा व अन्य दलों के पार्षदों ने इसे राष्ट्रगीत का अपमान बताते हुए ‘भारत में यदि रहना होगा, वंदे मातरम कहना होगा’ और ‘वंदे मातरम का अपमान, नहीं सहेगा हिंदुस्तान’ जैसे नारे लगाते हुए विरोध जताया था। इस बात को लेकर दोनों पक्ष आमने-सामने आ गए। भाजपा पार्षदों ने वंदे मातरम में उठ कर चले जाने वाले पार्षदों की सदस्यता रद्द किए जाने की मांग की, जिस बात को लेकर बैठक मंे खूब हंगामा हुआ था। वहीं बुधवार को मेयर हरिकांत अहलुवालिया ने भी भाजपा पार्षदों की बात का समर्थन करते हुए सदन में वंदे मातरम न गाने वाले पार्षदों के खिलाफ कार्यवाही की बात कही, जिसके बाद वंदे मातरम न गाने वालोें ने विरोध शुरू कर दिया।

देश की सुर्खियां बना मामला तो खुलकर बोले मेयर

वंदे मातरम न गाने वाले पार्षदों के खिलाफ कार्यवाही की चर्चा आम होते ही शहर की राजनीति में उफान आ गया। सपा और अन्य दलों के मुस्लिम पार्षदों ने इसे भाजपा की दबंगई बताते हुए सुप्रीम कोर्ट तक बात ले जाने की चेतावनी दे डाली। वहीं पूरे देश की मीडिया में भी मामला सुर्खियां बनकर छा गया। जिसके बाद ब्रहस्पतिवार को मेयर ने अपने कार्यालय पर पत्रकार वार्ता में वंदे मातरम न गाने वाले पार्षदों की सदस्यता समाप्त करने से इंकार किया। उन्होेंने बताया कि इस संबंध में भाजपा व अन्य पार्षदों ने प्रस्ताव दिया है, जिस पर विधिक राय लेकर कार्यवाही की जाएगी। इसी के साथ उन्होेंने कहा कि वंदे मातरम देश का राष्ट्रगीत है, आजादी की लड़ाई के दौरान भगतसिंह, राजगुरू और सुखदेव जैसे क्रांतिकारी हंसते-हंसते वंदे मातरम गाते हुए फांसी पर लटक गए। राष्ट्रभक्ति से जुड़े हुए गीत को गाने में किसी को आपत्ति नहीं होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि मामले का खामखां तूल दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि कुछ पार्षद शुरू से ही वंदे मातरम का विरोध करते आए हैं, जिसका विरोध अन्य पार्षद हमेशा करते रहे हैं। साथ ही यह भी बताया कि कुछ पार्षद बेवजह वंदे मातरम को हिंदु और मुस्लिम धर्म से जोड़कर माहौल खराब कर रहे हैं, यदि मुस्लिम समाज में वंदे मातरम गाना मना होता भाजपा के पार्षद तहसीन अंसारी और अन्य मुस्लिम महिला पार्षद मंगलवार को वंदेमातरम न गाते। उन्होंने इस मुद्दे को अगले कुछ माह में होने वाले नगर निगम के चुनाव और प्रदेश में हाल में सत्तसीन हुई भाजपा सरकार से जुड़ा होने से भी इंकार किया। उन्होंने साफ कहा कि वंदे मातरम किसी विशेष संप्रदाय का नहीं बल्कि पूरे भारतवर्ष का राष्ट्रगीत है, जिसे गाने में किसी भी भारतीय को अपमान नहीं, बल्कि गर्व का अनुभव करना चाहिए। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि वह या भाजपा का कोई पार्षद भी वंदे मातरम का गान करने के लिए किसी पर दबाव नहीं बना रहे। बल्कि हर भारतवासी को खुद वंदे मातरम का सम्मान करना चाहिये, यदि कोई वंदे मातरम नहीं गा सकता तो कम से कम राष्ट्रगीत के सम्मान खड़ा होना तो हर भारतवासी का फर्ज बनता है। इस दौरान सदन से बाहर चले जाना कहां तक उचित है।

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