गिरते जल स्तर को रोकने के लिए जल संरक्षण अत्यंत आवश्यक : आर्यका अखौरी

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मेरठ : मुख्य विकास अधिकारी आर्यका आखौरी ने कहा कि गिरते जल स्तर को रोकने के लिए जल संरक्षण व भूजल रिचार्ज अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि जल ही जीवन है, और इस जीवन को बचाये रखने हेतु अनावश्यक रुप से हो रहे जल दोहन को रोकना तथा वर्षा के जल का संरक्षण आज की सबसे महत्वपूर्ण जरुरत है। मुख्य विकास अधिकारी ने सभी विभागीय अधिकारियों से कहा कि वह अभियान चलाकर लोगो के इसके प्रति जागरूक करें और अपने अपने विभागों की जल ंसंरक्षण व भूजल रिचार्ज आदि कार्यो की कार्ययोजना बनाकर 22 अक्टूबर तक प्रस्तुत करें।

मुख्य विकास अधिकारी आज बचत भवन सभागार में राज्य भूजल संरक्षण मिशन के अन्तर्गत तकनीकि समन्वय समिति की बैठक की अध्यक्षता कर रही थी। उन्होंने कहा कि जल प्रकृति का वह अनुपम उपहार है, जिसके बिना जीवन की कल्पना नहीं की जा सकती है। किसी भी जीव या वनस्पति को वायु के बाद जल जीवन की रक्षा के लिए अति आवश्यक है। उन्होंने कहा कि पृथ्वी पर जीवों की उत्पत्ति सबसे पहले जल से हुई थी। उन्होंने बताया कि प्रदेश के भूगर्भ जल विभाग द्वारा राज्य भूजल संरक्षण मिशन संचालित किया गया है जिसके अन्तर्गत संकटग्रस्त विकासखण्डों को सुरक्षित श्रेणी में लाने हेतु वर्षा जल संचयन कर भूजल रिचार्ज किया जाएगा। उन्होंने बताया कि शासन द्वारा प्रदेश में गिरते जल स्तर को दृृष्टिगत रखते हुए निर्देश प्राप्त हुए है कि सम्बंधित विभागों के समन्व्य से एक विस्तृत सफल कार्ययोजना तैयार कर जल संरक्षण व भूजल रिचार्ज किया जाए।

उन्होंने बताया कि राज्य भूजल संरक्षण मिशन के अन्तर्गत वित्तीय वर्ष 2017-18 में प्रदेश के 25 विकास खण्डों का चयन किया गया, जिसमें जनपद मेरठ के विकासखण्ड रजपुरा का चयन किया गया है। उन्होंने बैठक में सम्बंधित सभी विभागीय अधिकारियों को निर्देशित किया कि वह जल संरक्षण व भूजल रिचार्ज हेतु तालाबों की सिल्ट सफाई व वाटर रिचार्ज, रिचार्ज पिट, स्कूलों आदि स्थानों पर ड्रेनेज सिस्टम पर अपनी विभागीय सफल कार्ययोजना तैयार कर 22 अक्टूबर तक उनके समक्ष प्रस्तुत करें ताकि मिशन को गति प्रदान कराते हुए उद्देश्य के अनुरूप सफल बनाया जा सके।

बैठक में मुख्य विकास अधिकारी ने विभिन्न विभागों के भूजल रिचार्ज के सम्बंध की जाने वाली कार्यवाही से अवगत होते हुए विभागवार भूजल रिचार्ज का लक्ष्य निर्धारित करने हेतु लघु सिंचाई विभाग को निर्देशित किया। उन्होंने विकासखण्ड क्षेत्र में पड़ने वाली सभी झील व तालाबों को नहरी पानी से भराव कराने के निर्देश दिये।

मुख्य विकास अधिकारी नेे कहा कि बढती जनसंख्या एवं औद्योगिकीकरण के कारण जल संसाधनों की मांग में अप्रत्याशित वृद्वि हुई है,जिसके परिणामस्वरुप शहरी व ग्रामीण क्षेत्रों में भूगर्भ जल स्रोतों का अनियंत्रित एवं अविवेकपूर्ण दोहन किया जा रहा है,जिसके स्थायी निजात के लिए आम जनता को जल दोहन व जल संरक्षण के संबंध में जागरुक किए जाने की आज सबसे महत्वपूर्ण जरुरत है। उन्होंने कहा यह तभी सम्भव है जब सभी जल के महत्व को समझे एवं उसका अनावश्यक दोहन न होने दें तथा बरसात के जल का अधिकाधिक संरक्षण करें।

इस अवसर पर परियोजना निदेशक भानू प्रताप सिंह, अधीक्षक अभियंता लघु सिंचाई वृत मेरठ डीएन शुक्ला, अधिशासी अभियंता लघु सिचाई विश्म्बर दयाल, अधिशासी अभियंता जल निगम सीताराम, सहायक अभियता लघु सिचाई रामोद शर्मा, खण्ड विकास अधिकारी रजपुरा रवि प्रकाश सिह व भूगर्भ जल विभाग के अधिकारी सहित सबंधित विभागीय अधिकारी उपस्थित थे ।

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